Honoring Prof. JP Yadav for Contributions to Disability Rehabilitation.

नारनौल: हाल में दिल्ली विश्वविद्यालय हंसराज कॉलेज एवं विज़न दिव्यांग फाउंडेशन ने एक रंगारंग कार्यकम में देश की भिन्न भिन्न संस्थाओं एवं महानुभावों को चिन्हित करके पुरस्कृत किया । इसी श्रृंखला में इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी के कुलपति, प्रोफेसर जेपी यादव को दिव्यांगजन सशक्तिकरण के लिए एक विशेष पुरस्कार देने की घोषणा की गई । चूंकि माननीय कुलपति महोदय पुरस्कार के कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं हो सके, उनका पुरस्कार संतोष मेमोरियल रिहैबिलिटेशन रिसर्च सेंटर के प्राचार्य डॉ. आर. एन. यादव एवं मैनेजर सुश्री श्वेता द्वारा यह पुरस्कार उनके आज निवास पर भेंट किया गया । इस अवसर पर कुलपति महोदय डॉ जे पी यादव ने हर्ष से यह पुरस्कार स्वीकार किया और दिव्यांगजन के उत्थान के लिए हर संभव प्रयास करने का वचन भी दिया ।

गौरतलब है कि संतोष मेमोरियल दिव्यांगजन एवं पुनर्वास केंद्र, नारनौल इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी मीरपुर से संबंधित है और वर्ष 2016 से दिव्यांगजन को समाज की मुख्य धारा में लाने के उद्देश्य से सतत प्रयासरत है।

इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी मीरपुर हरियाणा में चुनिंदा विश्वविद्यालय में से एक है जिसके माध्यम से प्रदेश में विशेष शिक्षक के पाठ्यक्रम भारतीय पुनर्वास परिषद भारत सरकार के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत समावेशी शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए अधिक से अधिक विशेष शिक्षक को शिक्षण प्रशिक्षण देना सरकार की प्राथमिकता है जिसके लिए इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी मीरपुर बखूबी सहयोग दे रही है । हाल ही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी भारत सरकार को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक स्कूल में विशेष शिक्षक की नियुक्ति की जाय ताकि समाज में दिव्यांगजन भी शिक्षा समावेशी शिक्षा के माध्यम से ले पाए । सीबीएसई बोर्ड द्वारा भी सभी स्कूल को यह सर्कुलर अनेकों बार जारी किया जा चुका है कि विशेष शिक्षक तुरंत प्रभाव से सभी स्कूल नियुक्त करें । गौरतलब है कि देश में लगभग 15 लाख स्कूल है और मात्र 2 लाख से भी कम भिन्न प्रकार के पुनर्वास कर्मी भारतीय पुनर्वास केंद्र के पास रजिस्टर्ड है (जिसमें विशेष शिक्षक सम्मिलित है); यह दर्शाता है कि अभी और अत्यधिक आवश्यकता है कि नए नए केंद्र एवं पाठ्यक्रम विशेष शिक्षक के शिक्षण प्रशिक्षण के लिए स्थापित हो, ताकि सभी स्कूलों के लिए विशेष शिक्षक नियुक्ति के लिए उपलब्ध हो सके ।

यह देखा गया है कि चूंकि कक्षा 12 के बाद मात्र दो वर्ष के प्रशिक्षण कार्यक्रम के उपरांत, ज्यादातर अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के अवसर अत्यधिक उपलब्ध हो रहे है, इससे नई पीढ़ी में विशेष शिक्षक बनने की एक नई उमंग और व्यवस्था, समाज में सामने आ रही हैं।